“कलवारी में कानून का कत्ल: माफियाओं की जेसीबी उगल रही सोना, खाकी और खनन विभाग ने ओढ़ी चुप्पी!”
"सैफाबाद में खनन माफिया का नंगा नाच: एसओ संतोष कुमार और खनन अधिकारी की मिलीभगत से खेत बने कब्रिस्तान!"
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: कलवारी में ‘खाकी’ और ‘खनन’ का नापाक गठबंधन, सैफाबाद बना गड्ढों का टापू!
ब्यूरो, बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- “बस्ती में ‘मिट्टी’ के सौदागर: योगी के जीरो टॉलरेंस को कलवारी पुलिस ने दिखाया ठेंगा, सड़कों पर दौड़ रही मौत!”
- “साहब की सरपरस्ती या मोटी घूस का असर? आखिर क्यों कलवारी में खनन माफियाओं के आगे नतमस्तक है प्रशासन?”
- “प्रशांत यादव की खामोशी के पीछे क्या है राज? शिकायत पर माफिया से मुंह छुपा रहे खनन अधिकारी!”
- “डीएम कृतिका ज्योत्सना का कब चलेगा हंटर? कलवारी पुलिस की नाक के नीचे लुट रहा राजस्व!”
- “धूल, धुआं और दहशत: सैफाबाद में अवैध खनन ने छीना ग्रामीणों का चैन, डंपरों के पहियों तले दब रहा कानून!”
- “गड्ढों में तब्दील हुए उपजाऊ खेत: कलवारी में खनन माफियाओं की दबंगई, सड़कों पर लहूलुहान हो रही जनता!”
कलवारी (बस्ती)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन कलवारी थाना क्षेत्र के सैफाबाद में खनन माफियाओं ने सरकार की साख को मिट्टी में मिला दिया है। यहाँ अवैध खनन का खेल इस कदर परवान चढ़ रहा है कि उपजाऊ खेत अब जानलेवा गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। सवाल यह है कि आखिर कलवारी एसओ संतोष कुमार की नाक के नीचे चल रहे इस काले कारोबार पर कार्रवाई कब होगी? क्या साहब को भ्रष्टाचार की गंध नहीं आ रही या फिर खामोशी के बदले ‘खास’ इंतजाम कर दिया गया है?
राजस्व को चपत, पर्यावरण का कत्ल
सैफाबाद में दिन-रात जेसीबी मशीनें धरती का सीना चाक कर रही हैं। मानक विहीन गहरी खुदाई से न केवल पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो रही है, बल्कि शासन के राजस्व को प्रतिदिन लाखों की चपत लगाई जा रही है। उपजाऊ मिट्टी माफियाओं की तिजोरी भर रही है और किसान अपने भविष्य को गर्त में जाते देख रहे हैं।
सड़कों पर मौत का तांडव, धूल फांकती जनता
मिट्टी लदे ओवरलोड वाहन कलवारी की सड़कों पर काल बनकर दौड़ रहे हैं। इन वाहनों से उड़ती धूल ने राहगीरों का दम घोंट दिया है, वहीं आए दिन हो रहे एक्सीडेंट्स ने मासूमों की जान जोखिम में डाल दी है। ताज्जुब की बात यह है कि कलवारी चौराहे से हर 30 मिनट पर अवैध मिट्टी लदे वाहन गुजरते हैं, लेकिन ‘तेजतर्रार’ कहे जाने वाले एसओ संतोष कुमार की नजरें शायद इन बड़े डंपरों को देखने में असमर्थ हैं।
खनन अधिकारी की भूमिका पर गंभीर सवाल
शिकायतों के बावजूद खनन अधिकारी प्रशांत यादव का रवैया संदेहास्पद बना हुआ है। आरोप है कि उनके संरक्षण में ही यह काला कारोबार फल-फूल रहा है। जब भी शिकायत होती है, साहब माफियाओं पर कार्रवाई करने के बजाय उनसे मुंह छुपाते फिरते हैं। क्या प्रशांत यादव का पद केवल माफियाओं को क्लीन चिट देने के लिए है?
क्या डीएम कृतिका ज्योत्सना का होगा हंटर?
कलवारी पुलिस और खनन विभाग के इस गठबंधन ने माफियाओं के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि अब वे दबंगई पर उतारू हैं। पुलिस का ‘खौफ’ अब केवल कागजों तक सीमित रह गया है।
बड़ा सवाल:
थाना क्षेत्र में अवैध खनन रोकने में पूरी तरह फेल साबित हो रहे एसओ कलवारी पर जिले की तेजतर्रार डीएम कृतिका ज्योत्सना कब एक्शन लेंगी? क्या इन ‘कुंभकर्णी’ नींद में सोए अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या फिर सैफाबाद की मिट्टी के साथ-साथ कानून भी ऐसे ही नीलाम होता रहेगा?
“खाकी का संरक्षण, माफिया का राज; सैफाबाद में हो रहा कुदरत का चीरहरण!”
“मिट्टी में मिला कानून: कलवारी चौराहे से गुजरते अवैध डंपर, ‘अंधे’ बने जिम्मेदार!”
















